Thursday, 31 August, 2006

जीवन बीमा जीवन का बीमा नहीं होता

बहुत ही अजीब सा फतवा निकाला है उलेमाओं ने कल। मुसलमान अपने जीवन का बीमा नहीं करवा सकता। क्यों? क्योंकि जीवन तो खुदा का दिया है और खुदा जब चाहे उसे वापिस ले सकता है। इंसान कौन होता है अपने जीवन का बीमा करवाने वाला। अब इस तरह के फतवे निकलते रहे तो हमारे जैसे लोगों का काम धंधा चौपट ही समझो। तो हमने अपना फर्ज समझा कि सबसे पहले इस गलत फहमी को दूर किया जाये।

जीवन बीमा नाम हो जाने से जीवन का बीमा नहीं होता। दुनिया की कोई कंपनी किसी के जीवन का बीमा नहीं कर सकती। जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति  का बीमा करती है तो यह नही होता कि उसे कुछ हो जाये तो उस में फिर से जान डाल दी जायेगी।

जीवन बीमा केवल बीमित व्यक्ति की मृत्यू की अवस्था में उसकी आय से होने वाली हानि  से परिवार को सुरक्षा प्रदान करता है। (A protection against the loss of income that would result if the insured passed away)। आज के दौर में जब शहरों में हर दूसरा व्यक्ति कर्ज लिये मकान में रहता है तो इस अवस्था में जीवन बीमा की अवश्यक्ता और भी बढ़ जाती है।

यूं तो बीमा कितना होना चाहिये यह  हर व्यक्ति के अपने हालात पर निर्भर करता है फिर भी एक साधारण समीकरण के अनुसार आप एक वर्ष में जितना कमाते हैं उस का आठ गुना राशि निकाल लें।  इस में आप अपनी तरल संपत्तियां (Liquid assets) जैसे नकदी, बैंक जमा और म्यूचव्ल फंड आदि  को घटा दें और अपनी देनदारियां जैसे लोन, बच्चों की जिम्मेदारी, अन्य कोई जिम्मेदारी(जैसे छोटी बहन की शादी का खर्चा या घर का कोई अपंग सदस्य जो आप पर निर्भर हो) को इस में जोड़ लें।  इस प्रकार जो राशि आयेगी उतनी राशि का बीमा आपको अवश्य लेना चाहिये। याद रहे कि मुद्रास्फीति का असर क्या होगा यह भी समायोजित(Adjust) कर लें। इसके लिये मेरा पिछला लेख क्या आप जल्द रिटायर्ड होना चाहते हैं देखें।

यदि आप चाहते हैं कि आप का परिवार किसी भी अनहोनी की अवस्था में इसी रहन सहन ( Living Standard ) को हमेशा के लिये कायम रख सके तो गिन कर देखिये आपको कितने बीमा की आवश्यक्ता है।

Sunday, 20 August, 2006

क्या आप जल्द रिटायर्ड होना चाहते हैं

 


इंन्फोसिस के चेयरमैन नारायनमूर्ती आज साठ साल की उम्र में रिटायर्ड हो रहे हैं। नारायनमूर्ती इस देश के हीरो हैं, बहुतों के आदर्श हैं मगर उनके जैसी सफलता हर कोई नहीं पा सकता।


मगर फिर भी हर किसी का एक सपना होता है कि एक उम्र तक इतना कमा और बचा लिया जाये कि उसके बाद रिटायर्मेंट के सुनहरे दिनों की जिंदगी को जी भर के जिया जाये।


पिछले सौ सालों में एक क्रान्ती हुई है, अनसुनी, अनदेखी, चुपचाप मगर हमारे बिल्कुल पास। शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धी है दीर्घायू। दुनिया भर में लंबी आयू की वजह से बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धी हुई है। केवल भारत में ही 2001 में 7.70 करोड़ बुजुर्ग थे जो कि बढ़ कर 2025 में 17.70 करोड़ हो जायेंगे। हमारी औसत आयू अगले दस वर्षों में 85 हो जायेगी और आबादी का दस प्रतिशत 60 से उपर की उम्र का होगा।


एक और जहां उम्र बढ़ रही है वहीं खर्चे बढ़ रहे हैं।घटती ब्याज दरें और बढती मुद्रास्फीति आपकी जमा पूंजी पर दोधारी तलवार सा असर करती हैं। आप भी अगर कम उम्र में योजनाबद्ध तरीके से अपनी रिटायर्मैंट की योजना अपने कैरियर की शुरुआत में ही बना लेते हैं तो इस सब से बच सकते हैं। उदाहरण के लिये आजके एक करोड़ रुपये की वास्तविक कीमत 5% मुद्रास्फीती के चलते 15 सालों में केवल 48 लाख ही रह जायेगी। आज जिस चीज की लागत 100 रुपये है वो 15 सालों में लगभग 210 रुपये में मिलेगी।


अगर आप युवा हैं तो यह मत समझिये कि अभी तो बहुत टाईम है, बचा लेंगे। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे उतना आपको कम बचाना पड़ेगा क्योंकि बाकी काम चक्रवृद्धी की शक्ती करेगी। जैसेकि एक पच्चिस वर्षिय युवा को केवल हर माह 5000/- रुपये ही बचाने होंगे जिससे उसे साठ की आयू में एक करोड़ की पूंजी मिल सके, मगर 35 वर्षिय व्यक्ती को इसके लिये हर माह 11000/- रुपये बचाने होंगे।


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Monday, 7 August, 2006

आईये चलें रोलरकोस्टर की सैर को

index.JPGक्या आप भी डरते हैं शेयर बाजार की ऊंची नीची चाल से? जिस चीज से आपको डर लगे उस चीज के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करना शुरू कर दीजिये, आपका डर समाप्त होने लगेगा। आईये देखें अब तक की शेयर बाजार की चाल और उसे थोड़ा समझने की कोशिश करें।



मुम्बई स्टाक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक जिसे संक्षेप में सेंसैक्स कहा जाता है, वहां के सर्वोच्च 30 शेयरों पर आधारित है।


सेंसैक्स का आधार है 31 मार्च 1979 | इस दिन यदि किसी व्यक्ति नेबिना किसी रिसर्च के केवल टाप के 30 शेयरों में एक लाख रुपये निवेश किये होते तो आज उनकी कीमत लगभग 110 गुणा यानी एक करोड़ दस लाख रुपये होती।




शेयर बाजार में लंबी अवधी का निवेश सदैव लाभ देता है क्योंकि लम्बी अवधी की चालपूर्णतः औद्योगिक विकास परनिर्भर करती है। छॊटी अवधी में बाजार भावनाओं पर आधरित होता है तथा उस समय के समाचारों और घटनाओं से प्रभावित हो सकता है।



यदि आप एक वर्ष के लिये निवेश करते हैं तो मार्च 2005 तक के आंकड़ॊं के अनुसार 26 के अनुपात में हानि की संभावना है 10| और यदि आप पांच वर्ष तक निवेशित रहते हैं तो 22 के अनुपात में हानि की संभावना है मात्र 3| इसी प्रकार यदि आप 15 या अधिक वर्षों तक निवेशित रहते हैं तो हानि की संभावना बचती ही नहीं।




छोटी अवधी में आप असाधारण लाभ अथवा असाधारण हानिप्राप्त कर सकते है यानि बाजार रोलर्कोस्टर सा चलता प्रतीत होता है।लम्बी अवधी में बाजार वस्तविक औद्योगिक विकास के बराबर जरूर पंहुंच जायेगा यानी बाजार रॉकेट की तरह केवल ऊपर की और ही जाता दिखता है। इसे आप यहां दिये आंकड़ों से भली प्रकार समझ सकते हैं।तो बाजार का पहला मंत्र है धैर्य।historys.JPG

Friday, 4 August, 2006

आईये जानें शेयर बाजार को

शेयर बाजार में पैसा बनाना बहुत आसान है उसी प्रकार शेयर बाजार में पैसा खोना भी बहुत आसान है। इससे बचा जा सकता है अगर आप स्वंयशेयर बाजार के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करें,शोध करें और दूसरों के दिये टिप्स पर न जायें।

शेयर बाजार एक खतरनाक खेल है, इसमें कूदने से पहले इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी ले लेना बहुत आवश्यक है।

यहां आपको कोई विशेष शेयरों के बारे में मैं टिप्स नहीं देने वाला हूं मगर आपको शेयर बाजार के तकनीकी पहलुओं से हिंदी मेंअवगत करने की कोशिश करुंगा।

यह ब्लाग होगा डम्मीस के लिये। यहां जानिये कैसे आप इन्फोसिस, रिलाईन्स या रैनबैक्सी में हिस्सेदार बन सकते हैं। क्या होते हैं राईट और बोनस शेयर। कैसे पढ़ें कंपनियों के तिमाही, छमाही और वार्षिक नतीजे। क्या होता है EPS और P/E और इसका शेयर की कीमत पर क्या असर होता है । इसी प्रकार के अनगिनत तकनीकि पहलुओं की जानकारी लीजिये यहां।

तो तैयार हो जाइये अमीर बनने के लिये..........।